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एगो बात हमरा बड़ा अचरच लागेला ….भोजपुरी, मैथली, थारु आदि का नेपाली भाषा से कम बाड़ीसन ?

‘हिन्दी को विरोध गर्छु किनकि हिन्दी मधेशी को भाषा होइन । अनि नेपाली ?  ‘सर, नेपाली हाम्रो राष्ट्र भाषा हो त्यसैले नेपाली बोल्नु पर्छ ।’
‘होइन, नेपाली भाषा चाहि मधेशको भाषा हो त ?’  ‘खै, त्यो चाहि थाहा भएन, तर हिन्दी चाहि पक्कै होइन ।’ 
ई एगो तथाकथिक ‘राष्ट्रवादी’ से कुछ दिन पहिले भइल बात चित के अंश हवे । अचरच के बात ई बा की हिन्दी के उ पुरज़ोर बिरोध करत बाड़े माकिर पुछनी की ‘नेपाली भाषा’ का मधेश के भाषा हवे, जे एकर बिरोध नईख करत तू ? त क़हत बाड़े की ‘नेपाली भाषा’ राष्ट्रभाषा हवे ओहिसे । सोचेके बात ई बा की….

का राष्ट्रभाषा होते मातर उ भाषा देश के सारा नागरिक पर थोपल जरूरी बा ?  का राष्ट्रभाषा हमेसा एके गो भाषा होला ? का दुनियाके हर देश के एके गो ‘राष्ट्र भाषा बाटे ? अगर जाने खातिर इच्छुक बानी त आगे जरूर पढ़ी । देखि बात साफ बा, हिन्दी मधेश के भाषा ना हवे ई बात सही बा त ई भी सही बा की ‘नेपाली भाषा’ भी मधेश के भाषा ना हवे । अगर कुछ नेता लोग हिन्दी भाषा मधेशी पर लादेके खोजत बा त नेपाली भाषा मधेशी पर पहिलही से लादल भाषा हवे । रहल बात की कुछ तथाकथित ‘राष्ट्रवादी’ लोग कहेला की ‘नेपाली भाषा’ राष्ट्र भाषा हवे ओसे एकर बिरोध ना होखे के चाहि, राष्ट्रभाषा के मान के चली ।

त हम बता दिही की आज के जमाना मे बहोत अइसन देश बाड़ीसन जे ‘बहुभाषिक’ नीति लेले बिया । जइसे की कनाडा ( दु गो भाषा), रसिया ( 1 + २७ ), सिंगापुर ( ४ गो), साउथ अफ्रीका (११ गो), स्विट्ज़रलैंड ( ४ गो इंग्लिश बाहेक), इजराइल ( २ गो, हिब्रू औरी अरेबिक) आदि ।
एगो आउर बात बता दिही की बहुते अइसन देश बाड़ी सन जेकर ‘राष्ट्रभाषा’ संविधानत: हईले नईखे । जइसे भारत, अमेरिका, औस्ट्रेलिया आदि । राउरा के जानकारी दिही की ‘स्विट्ज़रलैंड’ मे 5 गो राष्ट्रभाषा बाड़ी सन औरी अन्तिम स्थान पर ‘इंग्लिश’ बा, भारत मे 22 गो भाषा के मान्यता बा, औरी सभी भाषा के कामकाजी के दर्जा देहल बा । मतलब अनुसूचित सभी भाषा मे राउवा चहेम त हर चीज कर सकत बानी । पड़ोसी देश ‘भूटान’ मे त 12 गो भाषा के ‘राष्ट्रभाषा’ के मान्यता मिलल बा जेमे ‘नेपाली’ भाषा भी सामेल बा ।

एसे ई दलील देहल की ‘नेपाली राष्ट्र भाषा’ भइला के चलते हमनी के नेपाली बोलही के परी ई जरूरी नईखे । मधेश के भोजपुरी, मैथली, थारु,अवधि सभी भाषा राष्ट्र भाषा बने के हकदार बाड़ी सन ।ओसे आपन आपन सनस्क्र्ति, आपन रीतिरिवाज, आपन पहिचान औरी सही माएने मे आपन विकास करे के चाहत बानी त आपन भाषा के प्राथमिकता दहल बहोत जरूरी बा । संयुक्त राष्ट्र संघ भी ई बात के मानले बिया की बच्चा के विकास खातिर मातृभाषा मे शिक्षा देहल ही सबसे बेहतर औरी कारगर माध्यम हवे ।

apan birgunj बाट

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